हुआ सर्जिकल
मिला हमें बल
भौंके नेता
उन्हें नहीं कल
सैनिक मरता
रक्षा करता
पर लीडर जो
पॉकेट भरता
जब भी बोले
शबद न तोले
राष्ट्र-वायु में
बस विष घोले
मुँह की बोली
गन की गोली
जिसने दाग़ी
उसकी हो ली
उधर है पप्पू
इधर है लप्पू
रेत का दरिया
चलता चप्पू
कथन नाव है
इक चुनाव है
उठता क़ुरता
दिखा ताव है
हरिशचंद्र है
बुद्धि मंद है
इक मीरजाफ़र
इक जयचंद है
टीवी चैनल
बड़का पैनल
बातें बहती
खुला ज्ञान-नल
इनका दावा
उनका लावा
एक दारा तो
एक रंधावा
अजब चाल है
बस बवाल है
सच्चाई की
खिंचे खाल है
रक्त-दलाली
उसने पा ली
मुझे चांस कब?
कॉफ़र ख़ाली
फ़िल्म धुरी है
ओम पुरी है
उधर फ़वाद तो
इधर उरी है
पाक़ी ऐक्टर
नारी या नर
साथी सच के
अल्ला से डर
हे नर जोहर
अति तो न कर
यह भारत ही
है तेरा घर
बीइंग ह्यूमन
खोल गया मन
किधर खड़ा है
देखें जन-जन
बी सी सी आइ
बिग ऐपल पाइ
मेरा हिस्सा;
मुझको दे भाइ
तुम हो फेकर
मैं हूँ चेकर
मैं जज भी हूँ
मैं ही क्रिकेटर
पुस्तक बल है
भारी छल है
डूबी औरत
गहरा जल है
सारे हैं नत
सबकुछ शरियत
जेंडर वाइस
मर्द हैं एकमत
धर्म बड़ा है
शेख अड़ा है
जो लोटा है
कहे; घड़ा है
यही जाप सब
घुले ताप सब
मिटे धरा के
आज पाप सब
इस नौ राता
दुर्गा माता
जोड़ें सबका
बुद्धि से नाता

 

रचनाकार – शिव मिश्रा (@mishrashiv)

2 COMMENTS

  1. अद्भुत कविता,
    माडर्न गीता।
    सब को बाँधा,
    ऐसा ये फ़ीता।
    मज़बूत पकड़,
    शब्द, विषय पर।
    लोपक के है
    शिव मिश्रा दिनकर।
    समय मिले तो,
    हमे सीखा दो।
    हम भी छपे.
    ऐसा लिखा दो।
    इस कविता को,
    PUN: नमन है।
    हर लोपकी की,
    छाती छप्पन है।
    (मनु भाई)

  2. अत्यंत ही रुचिकर एवं तथ्यपूर्ण रचना

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