फिर चुनाव सब,
वही दाँव सब,
कहीं हाथ तो,
कहीं पाँव सब,
इधर हवा तो,
उधर है आँधी,
इधर अमित शा,
उधर हैं गांधी,
है कालप्पा,
औ येदुरप्पा,
रक्षा करिए,
हे अइयप्पा,
चर्च टेम्पल,
धर्म ऐम्पल,
पॉलिटिक्स का
जे इग्ज़ैम्पल,
शिवा भक्त है
समय सख़्त है,
लगा दाँव पर,
ताज तख़्त है,
भए पुजारी,
जनेऊधारी,
कुछ भी बन जा,
जे लाचारी,
ग़ज़ब भाव है,
अजब ताव है,
प्लेन तैरता,
उड़ी नाव है,
है आरक्षण,
मुद्रा भक्षण,
चमचा जी को,
सब संरक्षण,
थोड़ी आयत,
कुछ लिंगायत,
तोड़-फोड़ के,
कुर्सी पायत,
हिंदू सेक्यूलर,
बस चुनाव भर,
दल जीता तो,
मिटने का डर,
राहुल भैया,
सिद्धरमैय्या
देख रहे हैं,
‘विश्व-सरैया’,
टीपू देवा,
की कर सेवा,
वोट सोट ले,
चाभो मेवा,
कैश हाल है,
गोल्ड ताल है,
संग सौ टका,
“टंच माल है”,
कटे हुए पर,
घाट घाट घर,
“कहाँ कहा था?
हिंदू टेरर?”
मंदिर दौरा,
फूँक के बौरा,
फ़ोटो सोटो,
चौरी चौरा,
संग में छौड़ा,
देवेग़ौड़ा,
सिर पर मारे,
टन्न हथौड़ा,
फेक न्यूज़ है,
पेड व्यूज है,
देख सभी की,
बुद्धि फ़्यूज है,
बच्चा भैया,
खेते नैय्या,
बाँटे रेवड़ी,
इटली मैय्या,
वैशाख नंदन,
हल्दी चंदन,
ढूँढ लिए हैं,
दिव्य स्पंदन,
तीन से तेरह,
घूमे डह डह,
थोड़ा जोड़ के,
बन जा सोलह,
ताम झाम है,
बात आम है,
वोट सोट का,
लगा दाम है,
वोट दिलाओ,
येचुरी-माओ,
हमै जिताकर,
फिर से लाओ,
मिले अगर मन,
लो हमसे धन,
अगले बरस,
महागठबंधन,
ऐड एजेंसी,
लियो करेंसी,
भूलो सूलो,
एमरजेंसी,
डेटा चोरी,
लोटा-डोरी
सब करके भी,
सीनाज़ोरी,
जुआ फटिका,
माइंड सटिका,
उसपर कैम्ब्रिज
एनालिटिका,
मेरे पीडी,
सब स्पीडी,
बाँटो ईदी,
ममता दीदी,
भाषण गारी,
राशन भारी,
लोकतंत्र की,
महिमा न्यारी,

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पेशे से अर्थ सलाहकार. विचारों में स्वतंत्रता और विविधता के पक्षधर. कविता - हिन्दी और उर्दू - में रुचि. दिनकर और परसाई जी के भीषण प्रशंसक. अंग्रेजी और हिन्दी में अश्लीलता के अतिरिक्त सब पढ़ लेते हैं - चाहे सरल हो या बोझिल.

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