अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

सभी इदारे मिले हुए है,

जनरैल सारे खिले हुए हैं

ख़ुशी दिखे इमरान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

मीडिया भांड के माफ़िक़ नाचें,

जम्हूरियत के नियम बाँचें,

देख दुखी इंसान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

शेख़ रशीद रोज़ चिल्लाए,

हाफ़िज़ अपने गाने गाए,

चुप फ़ज़लू रहमान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

टेन परसेंट आसिफ़ ज़रदारी,

उधर शरीफ़ पे मुश्किल भारी,

जेल का है मेहमान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

मुल्क के अब इख़्तियार चंद है,

गई दिहाई, उधर बंद है,

मगरिब का अनुदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

सिंध खतम, पंजाब खतम है,

और खैबर में बम ही बम है,

रोता है मुलतान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

रावलपिंडी का क़ब्ज़ा है,

दहशत में मरियम, हमज़ा हैं,

लुटी हुई दूकान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

जिन्ना और इक़बाल भी रोए,

अजब मुल्क जो दहशत बोए,

नाम है पाकिस्तान तुम्हारी ऐसी-तैसी

अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी

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पेशे से अर्थ सलाहकार. विचारों में स्वतंत्रता और विविधता के पक्षधर. कविता - हिन्दी और उर्दू - में रुचि. दिनकर और परसाई जी के भीषण प्रशंसक. अंग्रेजी और हिन्दी में अश्लीलता के अतिरिक्त सब पढ़ लेते हैं - चाहे सरल हो या बोझिल.

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