टीवी एंकर्स, अखबारों के स्तंभकार व मूर्धन्य ट्विटकार पूरे साल के घटनाक्रम को हमारे सामने ‘गागर में सागर’ टैप परोसकर कैलेंडर से बेहतर यह बता रहे हैं कि नया साल दस्तक दे रहा है. बहरहाल, मैं थोड़ा और आगे बढ़कर पुराने साल के बचे खुचे दिनों में आपको नये साल का रेजॉल्यूशन लेने के लिए ‘प्रोवोक’ करना चाहता हूँ.

‘आशा पर आकाश टिका है’ ही सबसे बड़ा जीवन दर्शन है. किन्तु हमारे आशावाद की इंतिहा नये साल को लेकर ही होती है. नये साल की बधाईयों से लेकर मनाए जाने वाले जश्न और लिए जाने वाले रेजॉल्यूशन इसके प्रमाण हैं. ऐसा करने से पीछे शायद हमारा उद्देश्य होता है – यथार्थ को फतांसी में ढ़केलकर अच्छा फील लेने का. मुझे भी ‘केतनो करब सिंगार, पियवा त रहीहें उहे’ थोड़ी देर भूलकर रुमानी होने में कोई नुकसान नहीं दिखता.

तो आइए, नये साल का रेजॉल्यूशन लें. नये साल का रेजॉल्यूशन पहले ही सप्ताह में हाँफने लगता है, से डीमोटिवेट होना फिजूल है. आदमी जन्म लेता है और फिर मर जाता है, इसका मतलब यह नहीं कि आदमी जन्म ही न ले. नियम बनते हैं, टूट या बदल जाते हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि नियम बने ही नहीं. मोटिवेट करने वाले एक करेक्टर से मिलाता हूँ. नये साल पर दारु से तौबा करने का रेजॉल्यूशन लेने वाले एक मित्र दस जनवरी को दा पी करते दिख गये तो बिना किसी अपराध भाव के बोले; “रेजॉल्यूशन पर कायम हूँ. वो थोड़ा छोड़ने की खुशी में कभी कभी …” रेजॉल्यूशन लेकर ढ़ीठ होना आप इनसे सीख सकते हैं.

पत्रकार सनसनी और मनी को सच्ची पत्रकारिता के हनी से पटखनी देने का रेजॉल्यूशन ले सकते हैं, ट्विटकार भक्ति और भड़ास से आगे बढ़ने का. माननीय गण जुमलों के जाल में लोगों को हलाल नहीं करने का रेजॉल्यूशन लें. अनशन वीर अनशन को नहीं, स्टील गिलास को तिलांजली देने का संकल्प लें, आलू की फैक्ट्री वाले शेरो शायरी से परहेज रखने का. सरकारी बाबू चाय पानी छोड़कर समाज में सानी बनने की प्रतिज्ञा करें. हाकिम लोग हवा हवाई फरमान को अपने कमान से बाहर फेंकने का निश्चय करें. पुलिस वाले वर्दी को पाक रखने की कसम खाएं. पेशेवर लोग कमीशन मोड से मिशन मोड में आने का निश्चय करें. सरकारी शिक्षक गण कोचिंग क्लासेज पर ताले सुनिश्चित करने का प्रण लें. छात्र गण राष्ट्र को ‘भविष्य उज्जवल है’ का संकेत देने का खुद को बचन दें. फिल्मकार, साहित्यकार, लेखक व कलाकार गिरती गुणवत्ता के लिए पाठकों व दर्शकों को कोसना बंद करने की शपथ लें. खिलाड़ी और खेल प्रशासक खेल से खेलना बंद करने पर विचार करें. आलसी लोग आलस छोड़ने का, पकाऊ लोग थकाना छोड़कर जकाने का, बेडौल लोग व्यायाम का और सुडौल प्रभु के नाम का, देर रात सोने वाले सुबह जगने का रेजॉल्यूशन लें. लास्ट बट नॉट लीस्ट, आम जन सारी बुराईयों के लिए खुद को छोड़कर शेष सबको जिम्मेदार मानने से सख्त परहेज करने की भीष्म प्रतिज्ञा करें एवं कैशलेस बनकर राष्ट्र को डिजिटल करने में योगदान देने का संकल्प लें. वैसे आरबीआई ने कैशलेस रहने का उपाय कर ही रखा है.

मैं जानता हूँ कि उपर बताए गए सारे रेजॉल्यूशन जीवन से लाख गुना अधिक क्षणभंगूर हैं. फिर भी मैं इनकी वकालत कर रहा हूँ. मन में मद्धिम सी आस है कि कहीं चमत्कार वश या भूल से ये रेजॉल्यूशन सच में ले लिए गए तो देश का कायाकल्प हो जाएगा. सरकार को कम से कम इस साल एक रेजॉल्यूशन सबके लिए अनिवार्य कर देना चाहिए – डिजिटल लेन-देन करने का. साथ ही ऐसा करते हुए भावनाओं को डिजिटल होने से रोका जाने का उपाय भी होना चाहिए वरना चंदे-वंदे भी डिजिटल करने की फिजूल भावनात्मक माँगें उठने लगेंगी.

रेजॉल्यूशन लेकर उसके टूटने से डरने वालों को ढ़ीठ बनने का उपाय उपर बता दिया गया है. और अगर आप कहकर निभाने वाली लुप्तप्राय प्रजाति से आते हैं तो मेरे जैसा चंट बनिए. मैं हर साल रेजॉल्यूशन लेता हूँ क्योंकि ऐसा करना राष्ट्र के विकास के लिए जरुरी मानता हूँ. मेरे रेजॉल्यूशन की खासियत यह है कि यह टूट ही नहीं सकता. हर साल की भाँति इस साल भी मेरा रेजॉल्यूशन है – कोई रेजॉल्यूशन नहीं लेने का रेजॉल्यूशन.

लोपक की ओर से पाठक गण क्रिसमस व दहलीज पर खड़े नये साल की ढ़ेरों शुभकामनाएं स्वीकार करें.

लेखक : राकेश रंजन (@rranjan501)
रेखाचित्र : सुरेश रंकावत (@Sureaish)

1 COMMENT

  1. रिजाल्वेशन न लेने का रिजाल्वेशन सबसे उत्तम. बाकी सभी सुझावित रिजाल्वेशन देशहित में जरूरी है.

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