डियर बुद्धिजीवियों,

पटाखों से होने वाले प्रदुषण की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिये धन्यवाद। पटाखे तो खैर हमें जलाना ही था। बाकी आपसे पर्यावरण को बहुत उम्मीदें हैं। वैसे तो आपने अपनी तरफ से पर्यावरण की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी होगी फिर भी कुछ बिंदुओं पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।

अक्तूबर लगभग बीत चुका है, अगर अब भी एसी चला रहे हैं तो कृपया कम से कम इस सीजन के लिये बंद कर दें क्योंकि आपके एसी को एक घंटा बिजली देने के लिये एनटीपीसी को दो किलो कोयला मुजफ्फरपुर में जलाना पड़ता है। अब आपकी रईसी का खामियाजा मुजफ्फरपुर की जनता क्यों भुगते? फिर एसी का एक्जॉस्ट जो गर्मी पैदा करता है उससे गली का कुतवा (वही कुतवा जिसकी चिंता में आप हमको पटाखे नहीं जलाने देना चाहते) को परेशानी होती होगी। अब वो बेचारा तो एसी अफोर्ड नहीं कर सकता ना।

अपनी कार का त्याग तो आप नहीं कर पायेंगे, बाँकी जब भी बाजार जायें तो अपनी गाड़ी सड़क पर ना पार्क कर के पार्किंग में पार्क करें। क्योंकि आप जब पार्किंग का बीस रुपया बचाने के लिये गाड़ी रास्ते पर खड़ी करते हैं तो उससे जो जाम लगता है उसमें इंधन और झाँ दोनो जलती हैं जिससे दोहरा प्रदूषण होता है।

जल बोर्ड का पानी भर पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन थोड़ा सा प्रयास करके आप अपने सबमर्सिबल पंप से छुटकारा पा सकते हैं। आपको तो पता ही होगा भूजल स्तर बनाकर रखना कितना जरूरी है पर्यावरण के लिये। (फिर हमें मार्च में पानी से होली भी तो खेलना होगा ना)

कृपया अपनी दिनचर्या में देखें कि पर्यावरण की रक्षा के लिये और कौन कौन से कदम आप उठा सकते हैं। क्योंकि पटाखे तो हम अगले साल भी जलायेंगे। अगर आप ये कदम उठायेंगे तो कम से कम आपकी गां जलने से होने वाले प्रदुषण में कमी आयेगी और हम भी गिल्ट फ्री दिवाली मना सकेंगे।

आभार.
आपका प्यारा दुलारा दस्यु (@khadheran)

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