भगवान श्री राम का पिछले १५ दिनो से कोई अता-पता नहीं था। अयोध्या में सभी लोग बहुत चिंतित थे। भगवान श्री राम बिना किसी को बताये इतने दिन के लिए कही आते जाते नहीं थे परन्तु इस बार किसी को थाह भी नहीं लगने दी। लक्ष्मण की चिंता बढ़ती जा रही थी। रावण का वध हो चुका था तो किसी और के अंदर राम का अपहरण करने की ताकत नहीं थी। परंतु दूसरी तरफ रावण की मृत्यु के बाद विभीषण राक्षसो का साम्रज्य अच्छे इंसान की तरह चला रहे थे जिसके विरोध में आए दिन नए नए दानव जन्म ले रहे थे। दानवो में आपसी ताकत दिखाने की होड़ लगी थी इसलिए वो श्री राम का अपहरण करके अपनी ताकत दानव जाति में दिखाना की कोशिश कर सकते थे लेकिन विभीषण ने इस बात को सिरे से नकार दिया और कहा कि दानव जाति उनके पूरे नियंत्रण में है और किसी दानव में ऐसा काम करने का सामर्थ्य नहीं है।

लक्ष्मण ने गुप्तचरों को चारो तरफ राम की खोज में भेज दिया और शाही पंडित को बुलाकर राम की सलामती के लिए यज्ञ शुरू करने को कहा। पंडित जी तो जैसे इस दिन की राह देख रहे थे। यज्ञ का नाम सुनते ही पंडित जी खुश हो गए लेकिन ख़ुशी चेहरे पर नहीं आने दी। पंडित जी ने सोचा कि यही समय है जितना हो सके उतना पैसा इस यज्ञ में बना लेते है, राम रोज – रोज लापता थोड़े होते है। पंडित जी हवन में लगने वाली सभी सामग्रियों की सूची बनाकर लक्ष्मण जी के हाथ में दे दी। सूची में कई नाम ऐसे थे जिसे लक्ष्मण जी भी पहली बार सुन रहे थे। एक तरफ श्री राम लापता थे और दूसरी तरफ पंडित जी खर्चा बढ़ा रहे थे, वैसे ही राजशाही दिखाने के चक्कर में कुबेर महाराज से बहुत कर्ज लिया जा चुका था। कुबेर महाराज भी श्री राम के लापता होने से सदमे थे कि कही पूरा का पूरा कर्ज डूब न जाए, क्योंकि कर्ज देने के लिए
उन्होंने कोई पर्सनल कोलेटरल नहीं लिया था।

पंडित जी की दी हुई हवन सामग्री में कुछ वस्तुएं बहुत ढूंढने पर भी नहीं मिली। जो सामग्रियां नहीं मिली थी वो इस प्रकार थी कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़। लक्ष्मणजी ऐसे ही श्री राम को ढूंढने में परेशान थे और अब उन्हें यज्ञ के लिए कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ भी ढूंढनी थी। लक्ष्मण जी ने दो सदस्यों की एक कमेटी बनाकर उन्हें कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ ढूंढ कर लाने को को कहा। खोजी कमेटी कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ की खोज में निकल गई। २ दिन बाद खोजी कमेटी लक्ष्मणजी के सामने उपस्थित हुई और उन्हें बताया की कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ अयोध्या और बाहर की सभी राज्यों में लाख ढूंढने पर भी नहीं मिली यहां तक की अमेजॉन की वेबसाइट पर भी ये सामान नहीं है।

हवन सामग्री के न मिलने से लक्ष्मण जी बहुत परेशानी में थे, उन्होंने सोचा की यदि आज हनुमान जी होते तो वो कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ जरूर ढूंढ कर लाते। अंत में परेशान होकर लक्ष्मण जी पंडित जी के पास पहुंचे। पंडित जी पहले से जानते थे की कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़नहीं मिलेगी वो तो बस लक्ष्मण जी के हार मानाने का इंतजार कर रहे थे। पिछली बार यज्ञ करने के बाद लक्ष्मण जी ने टीडीएस काटकर पेमेंट की थी और पैन कार्ड न होने के चलते पंडितजी का २०% टीडीएस काट लिया गया था,तो पंडित जी इस बार ज्यादा पैसा वसूल करना चाहते थे। यदि वो सीधे सीधे लक्ष्मणजी से अधिक पैसे मंगाते तो वो कोई न कोई बहाना बनाकर पंडित जी को टाल देते इसलिए उन्होंने हवन सामग्री में कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ का नाम गिना दिया था। जो यजमान दक्षिणा देने में नौटंकी करता था सबकी सूची में कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ सबसे जरूरी हवन सामग्री बन जाती थी।

लक्ष्मण जी ने पंडित जी से कहा, पंडित जी कौए की ढेकार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ नहीं मिल रही है आप कोई दूसरा रास्ता निकालिए। पंडित जी ने मन ही मन मुस्कुराते हुए कहा कि शास्त्रो को देखकर कोई मार्ग बताता हूं। शाम को पंडित जी लक्ष्मण जी के पास पहुंच गए। पंडित जी ने लक्ष्मण जी से कहा कि शास्त्रों के अनुसार यदि कौए की कार, चिरई का दूध और पुरानी नदी की सोढ़ यज्ञ करने के लिए न मिले तो यजमान को १०० ग्राम सोने की बिस्किट का दान यज्ञ करने वाले पंडित को देना चाहिए। लक्ष्मण जी के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, ऊपर से दरबारियों का दबाव हवन कराने के लिए बढ़ते जा रहा था। अयोध्या के एक दरबारी की छोटी बहन की शादी पंडित जी के बेटे से हुई थी तो वो पूरी लॉबी के साथ हवन जल्द से जल्द शुरू करवाना चाहता था जिससे पंडित जी को दक्षिणा मिलना चालू हो जाए। लक्ष्मण जी ने सोनार को सोने की बिस्किट बनाने का हुक्म दिया और पंडित जी से हवन शुरू करने का आग्रह किया।

राम जी का वापस आना बहुत जरुरी था क्योंकि उन्होंने अयोध्या के एनुअल एकाउंट्स पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किये थे और कुछ ही दिनों में अयोध्या के सभी डायरेक्टर्स की बोर्ड मीटिंग होनी थी और उस मीटिंग में श्री राम के हस्ताक्षर वाली बैलेंसशीट देनी थी। अयोध्या के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने भी बैक डेटेड बैलेंसशीट साइन करने से मना कर दिया था। दूसरी तरफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस पर नोटिस भेज रहा था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना था की लंका से आते समय जो भी सामान राम जी, लक्ष्मण और सीता जी लाई थी उसपर इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं चुकाई गई थी। अयोध्या के कानूनी सलाहकार का कहना था की राम जी, लक्ष्मण और सीता जी सभी लोगो पिछले कई सालो से अप्रवासीय भारतीय थे इसलिए इम्पोर्ट ड्यूटी गुड्स एक्ट के तहत लंका से लाई सभी वस्तुओ पर इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं बनती है। इनकम टैक्स की इस रिप्लाई पर श्री राम के अलावा कोई हस्ताक्षर नहीं कर सकता था और दूसरी तरफ इनकम टैक्स को जल्द से जल्द रिप्लाई भेजनी थी।

अब भगवान श्री राम को लापता होकर कुल ३० दिन बीत चुके थे। गुप्तचरों को कोई लीड नहीं मिल रही थी। अयोध्या की टेक्नोलॉजी टीम भी श्री राम को उनके जीपीएस कुण्डल से ट्रैक करने की कोशिश कर रही थी। परंतु श्री राम का कुण्डल ट्रैकर स्क्रीन पर नहीं आ रहा था। अचानक से साफ़ सफाई करते वक़्त श्री राम का कुण्डल एक कर्मचारी को श्री राम के शयन कक्ष से मिल गया, १००% सोने का था आज का इंसान तो कुण्डल जेब में डालकर घर चला जाता लेकिन इन जनाब ने ईमानदारी की बहुत फिल्मे देखी थी तो कुण्डल ले जाकर श्री लक्ष्मण जी को सौंप दिया। लक्ष्मण ने आखिर हार मानकर हनुमानजी और सुग्रीव को बुलाने का निर्णय लिया। लक्ष्मण ने ये निर्णय देर से लिया क्योंकि सुग्रीव के वानर सेना का खर्च उठाना बहुत महंगा था और इस बार तो मार्च के सर्विस टैक्स का पेमेंट भी नहीं हुआ था।

रामलीला मैदान में एक वॉर रूम बनाया गया। ४५ दिन बीत चुके थे और अभी भी भगवान श्री राम का कोई अता पता नहीं था। हनुमानजी और सुग्रीव हर मीटिंग में राम को न ढूंढ पाने के नए नए बहाने देते थे। सुग्रीव सेना का एक बंदा जो आईआईएम से MBA करके आया था उसने अपने प्रेजेंटेशन में साफ साफ बता दिया कि हो सकता है भगवान श्री राम मलेशियन एयरलाइन को ढूंढने चले गए है और हमें अब उन्हें कलयुग में जाकर ढूंढना पड़ेगा। लक्ष्मण ने कहा तुम्हारी बात में दम है परन्तु कलयुग में जानेवाली मशीन तो अभी तक नहीं बनी है। झट से आईआईएम वाला बोल पड़ा की एनिसेंट एलियन में दिखाते है की पुष्पक जहाज एक स्पेस क्राफ्ट है और शायद उससे हम काल में सफर कर सकते है। अब लक्ष्मण ने रिटायर्ड लोगो की कमेटी बनाकर उन्हें कलयुग में भेजने का प्रस्ताव दिया। जामवंत जी उस दल के चेयरमैन थे।

सतयुग से कलयुग में आने का सफर बहुत ही लम्बा था। आप सोच रहे होंगे श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था तो जामवंत जी ने सतयुग से यात्रा का आरंभ क्यों किया। तो उसका जवाब ये है की उस MBA पास बंदे ने टूर यात्रा प्लान की थी और उसे अपना बायोडाटा मजबूत करना था तो जितने युग की यात्रा करता अगले जॉब के समय उतना अधिक पैसे मांग सकता था। आखिर करोडो प्रकाशवर्ष की दुरी तय करके जामवंत जी कलयुग में पहुँच गए। जहाँ भी जाते लोग उन्हें घूर घूर कर देखते। कई बार तो प्राणी संग्रहालय वाले उनके पीछे पड़ गए और उन्हें जानबचाकर भागना पड़ा। कई दिन बीत चुके थे परन्तु भगवान श्री राम का कोई अता पता नहीं था। जामवंत जी रोज़ स्काइप पर अपना दिन भर का ब्यौरा लक्ष्मण को दे देते थे। आखिर एक दिन जामवंत को लीड मिल गई। किसी ने बताया की कुछ दिन पहले एक आदमी भगवान श्री राम का वेश बनाकर यहाँ आया था और कह रहा था मुझे नमाज पढनी है। परन्तु लोगो ने उसे कोई बहरूपिया
और पागल समझकर भगा दिया। शाम को जामवंत जी ने लक्ष्मण को स्काइप किया तो पता चला की भगवान श्री राम अयोध्या आ चुके है।

भगवान श्री राम के आने पर एक चिंतन सभा बुलायी गई। उस सभा में सभी ने भगवान श्री राम से इतने दिन लापता रहने का कारण पूछा। भगवान राम ने बताया किस तरह उन्होंने कलयुग में घोर कलयुग देखा। श्री राम अपने कलयुग यात्रा का जिक्र कर ही रहे थे की लक्ष्मण जी ने बीच में उन्हें टोकते हुए कहा कि श्री राम मैं क्षमा चाहता हूं लेकिन आप सबसे पहले ये बताए की आप कलयुग में क्यों गए थे ?

भगवान श्री राम ने कहा की वो एक दिन शाम को अयोध्या की यात्रा कर रहे थे तभी उन्होंने ने एक धोबी को बोलते सुना की भगवान श्री राम सेक्युलर नहीं है। मै धोबी के पास गया और उससे पूछा की भाई ये सेक्युलर का मतलब क्या होता है। धोबी ने बताया की जो हिन्दू मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ता है उसे सेक्युलर माना जाता है। धोबी ने बताया की उसे कही से पता चला है की भगवान श्री राम के पास सेक्युलर होने का सर्टिफिकेट नहीं है। मैंने धोबी से पूछा की भाई ये सर्टिफिकेट कहाँ बनता है तो उसने बताया की कलयुग में कुछ राजनीतिक दल है जो मस्जिद में नमाज पढ़ने पर हिंदुओ को सेक्युलर सर्टिफिकेट गैरंटी के साथ बनाकर देते है। धोबी कह रहा था की अगर इस बार भगवान श्री राम के पास सर्टिफिकेट ना होगा तो मुझे वोट नहीं करेगा और इस लिए मै सेक्युलर सर्टिफिकेट बनवाने कलयुग में चला गया था।

लेखक : कमल उपाध्याय (@puraneebastee)

1 COMMENT

  1. अच्छा प्रयास था। पर कई जगह ऐसा लग रहा है कि आपकी इस लेख पर से पकड़ ढीली हुई जा रही है। जो कसावट एक व्यंग लेखन में होनी चाहिये, उसका आभाव झलक रहा है। कुछ छोटा करके इसे कसा जा सकता था। इसका अंत और भी रोचक बनाया जा सकता था।
    फिर भी आपका प्रयास सराहनीय है, ऐसे ही लिखते रहिये। 🙂

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