“हस्तिनापुर टाइम्स, हस्तिनापुर एक्सप्रेस हस्तिनापुर टूडे और टाइम्स ओफ हस्तिनापुर, सब बदनाम हो गए हैं जीजाश्री। अब इनकी न तो ख़बरें पढ़ी जाती हैं और न ही संपादकीय। अब जब भी ये भांजे दुर्योधन को महान बताते हैं तो लोग हँसते हैं और चुटकुले बनाते हैं। ऊपर से आपके भतीजों के समर्थकों ने मुख्यपृष्ठ और चहचह डोट कोम पर क़ब्ज़ा कर लिया है”

हस्तिनापुर राजपरिवार की मीटिंग चल रही थी जिसमें महाराज धृतराष्ट्र, शकुनि, युवराज दुर्योधन, उपयुवराज दुशासन, जीजाश्री जयद्रथ और मित्रश्री कर्ण उपस्थित थे।

मामाश्री शकुनि की बात सुनकर महाराज धृतराष्ट्र ने पूछा; “तो इस समस्या का हल क्या है शकुनि? आपकी क्या योजना है?”

शकुनि ने अपनी अक़्ल की दाढ़ को टटोला और बोले; “एक बात साफ़ है जीजाश्री कि इन समाचारपत्रों के संपादक, संवाददाता, फ़ोटोग्राफ़र, कोलमनिस्ट वग़ैरह सब बदनाम हो चुके हैं। अब इन्हें मुद्रा, राजमहल के पद, और पुरस्कार देने का कोई फ़ायदा नहीं है।”

“वह तो ठीक है शकुनि। तुम कहते हो तो इन्हें और कुछ नहीं देंगे परंतु यह तो बताओ कि ये अख़बार और टीवी चैनल नहीं करेंगे तो पुत्र सुयोधन की जयजयकार कौन करेगा? और इसके कानों को जय जयकार सुनाई न दिया तो यह तो बीमार हो जायेगा। तुम मुझे इस समस्या का त्वरित समाधान दो”

दूसरे दिन मामाश्री शकुनि ने चौपड़ की गोटियाँ लेकर तरह तरह की साधना की और संध्या बेला जब कक्ष से निकले तो उनके मुख पर मुस्कान थी।

दूसरे ही दिन मामाश्री शकुनि ने गांधार के एक अश्व व्यापारी, अवंती के लौह व्यापारी, विदर्भ के दो तेल व्यापारियों को बुला भेजा। जब कक्ष में सारे आ गए तो मामाश्री ने बोलना शुरू किया; “महाजनों, हस्तिनापुर राजपरिवार आपसे कमीशन के कितनी स्वर्ण मुद्राएँ पाता है?”

सारे व्यापारियों ने हिसाब किताब देख कर स्वर्ण मुद्राओं की संख्या बताई। संख्या सुनकर मामाश्री बोले; “हे महाजनों अब तुम्हें ईमानदार होने का अपना स्वाँग और ज़ोर से भरना होगा।”

लौह व्यापारी ने मामाश्री को देखा और पूछा; “हे महाराज आप क्या कहना चाहते हैं?”

मामाश्री शकुनि बोले; “हे महाजनों, हम चाहते हैं कि राजपरिवार को जितना कमीशन मिलना है उतना आप हमारे मीडिया के नए व्यापार में निवेश कर दें।”

लौह व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा; “महाराज, राजपरिवार क्या अब मीडिया के धंधे में जायेगा?”

मामाश्री मुस्कुराते हुए बोले; “हे महाजन, राजपरिवार इस धंधे में कब न था? अंतर बस इतना है कि अब राजपरिवार आप के माध्यम से इस धंधे में उतरेगा। आपलोग स्वतंत्र मीडिया की रक्षा के लिए एक ट्रस्ट बनाएँ और ईमानदार दिखते हुए इसमें निवेश करें। समाचारपत्रों को लोग याद रखते हैं, उन्हें चलानेवालों को नहीं। हम उन्ही लोगों को नए कपड़े पहनाकर पेश करेंगे”

पंद्रह दिन बाद कमीशन की स्वर्ण मुद्राओं ने स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा करते हुए तार डोट कोम, मुद्रण डोट कोम और कल्टन्यूज़ डोट कोम को जन्म दिया।

पत्रकारिता को नया जोराजामा मिला।

लेखक : @Shivkrmishr

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.