एमसीडी चुनावों पर तिरछी नजर

भारत एक चुनाव प्रधान देश है. एक चुनाव जाता नहीं कि दूसरा आ धमकता है. जल्दी-जल्दी चुनाव होने के अनेक फायदे हैं. इससे लोकतंत्र में जड़ता नहीं...

वोट निंद्य है ।

वोट निंद्य है । वोट निंद्य बेशर्मराज पर कहो नीति अब क्या हो? कैसे वोटर रिझे आज फिर पांव तले तकिया हो? प्रतिपल मूर्ख वोटर को ठगता, मफ़लर-बद्ध चेहरा हो...

वो भारत खंड -3

दावात्याग: व्यसन वही है, कल्पना वही है. यथार्थ से वास्ता अब भी नहीं है. (वो भारत खंड -२ से आगे) अगली बैठक जिसमें घनानंद, संग्राम सिंह को उस भारत...

सिंगिंग रियलटी शो

एक जमाना था जब परीक्षा का प्रश्नपत्र सेट करने वाले विद्वान् विद्यार्थियों को चैलेन्ज जैसा कुछ देते थे कि वे पोस्टमैन, मेरा गाँव, रेलयात्रा जैसे विषयों पर...