गाँधी जी का जन्मदिन – नेताजी का भाषण

हर साल की तरह इस साल भी २ अक्टूबर आ ही गया. हर साल की तरह इस साल भी भाषणों की झड़ी लगेगी, टीवी पर गाँधी फिल्म...

छटाक भर क्रिकेट

दिन भर आकाशवाणी से क्रिेकेट का आँखों देखा हाल सुनते मेरे पिताजी ने ही मेरे मन में क्रिकेट के प्रति प्रेम जगाया. बॉल बाई बॉल रोमांच से...

मेट्रो महिमा

दिल्ली मेट्रो रेल का फैला जाल राष्ट्रमंडल खेलों से दिल्ली की आधारभूत संरचना में हुए बदलावों का एक पैमाना है. इस दौरान हुए घोटालों को कोसने वालों...

एमसीडी चुनावों पर तिरछी नजर

भारत एक चुनाव प्रधान देश है. एक चुनाव जाता नहीं कि दूसरा आ धमकता है. जल्दी-जल्दी चुनाव होने के अनेक फायदे हैं. इससे लोकतंत्र में जड़ता नहीं...

योगी की चेतावनी !

न हो कबाब तो आधा दो हो पास अगर तो ज़्यादा दो बस दे दो हमको दो सौ ग्राम रक्खो अपनी प्लेटें तमाम हम वही ख़ुशी से खायेंगे आगे न माँग उठाएँगे पर...

राजनीति के पंचम सुर पर अलाप

गांधी से कहके हम तो भागे, कदम टिकते नहीं साहब के आगे रंज लीडर को बहुत है मगर हार के बाद कुछ ऐसा ही हुआ महसूस हुआ रिकार्ड तोड़ जुमलों, मनभावन...

लोकतंत्र में जातिवाद 

आज आपको एक कहानी सुनाता हूँ। बहुत पहले जंगल में लोकतंत्र की स्थापना हुई। उसी जंगल में एक खलीलाबाद नाम का उपवन था। उस उपवन में गधों...

दलो का दलदल

मेढ़कों को तराजू के दो पलड़ों पर रखकर आप भले ही तौल लें पर चुनावी मौसम में माननीयों का लोकतंत्रीय उछल-कूद (मने दलबदल) रोकना लगभग असंभव है....

मैं सेफोलॉजिस्ट बनूँगा

हम बनना कुछ और चाहते हैं, बन कुछ और जाते हैं. हम ड्रीम पालते हैं, पैशन को सेलिब्रेट करते हैं पर दाल रोटी के लिए कहीं और...

कोहरा प्रधान जीवन 

पिछले कई दिनों से जीवन कोहरा प्रधान हो गया है. चारों तरफ कोहरा ही कोहरा है. इधर कोहरा, उधर कोहरा. आसमान में कोहरा जमीन पर कोहरा. सड़क...