Glimpses of ‘Digital India’ in Hinterlands

By the time I reached Mughal Sarai Junction it was 2.30 AM. I was on way to Varanasi to take a morning flight and the time wasn't...

यादों के झरोखे से : रिक्शावाला

"कै गो अमदी है?" - रिक्शेवाले ने पूछा! "अमदी"? - आँखो में प्रशनचिन्ह लिए अपने दोस्त की ओर देखा! मेरा मित्र जो बगल मे खड़ा था, उसने कहा...

लिट्टी के अलावा आखिर मिलता क्या है बिहार में?

और फिर दन्तेश्वरी (एकिता) ने लिखा "गवर्नमेंट डिसाइड्स टू मेक लिट्टी चोखा ए नॅशनल फुड टू सेव बिहारी क्विज़ीन बिकॉज़ इट ओन्ली हैज़ वन डिश..", और दांत...

टुन्न थे, सुन्न हुए

यह लोकतंत्र की खूबसूरती है कि नयी सरकार बनने के बाद शुरुआती कुछ महीने वह चुनाव में अपनी पार्टी के किए गए वादे पूरे करने में चुस्ती...

स्मृति शब्द चित्र : स्व. नगनारायण दुबे

रविवार की एक दोपहर अचानक पंड़ित जी याद आ गये और उनकी स्मृति में मैं एक शब्द चित्र बनाने लगा. यकीन करिए - यहाँ वर्णित घटनाएँ घटित...

वाह ताज !

भाजपा के एक विधायक की ताजमहल पर की गयी टिप्पणी के बाद देश भर में ताजमहल पर कई प्रकार की डिबेट आरम्भ हो गयीं। एक पक्ष ने...

नीम हकीम या वैद्यजी – चुनाव आपका

साधन संपन्न मगर भोलेभाले लोगों से भरपूर एक आदर्श गाँव था। गाँव वाले इतने सीधे थे कि उन्हें ना तो पंचायत की आवश्यकता थी और ना हीं...

जय छठी मैया !

यदि आप बम्बई या दिल्ली में रहते हैं तो पाएँगे की दीवाली की लम्बी छुट्टियाँ बीत जाने के बाद भी सड़कें खाली हैं और यदि पटना या...

बापी दास का क्रिसमस

यह निबंध नहीं बल्कि कलकत्ते में रहने वाले एक युवा, बापी दास का पत्र है जो उसने इंग्लैंड में रहने वाले अपने एक नेट-फ्रेंड को लिखा था....

भांति भांति के पर्यटक

पर्यटन कभी ग्रीष्मकालीन छुटियों का पर्याय हुआ करता था. अप्रैल के आस पास से ही कुछ घरेलु पत्रिकाएं पर्यटन विशेषांक निकालने लगती थीं. इन्टरनेट के आगमन के...