टुन्न थे, सुन्न हुए

यह लोकतंत्र की खूबसूरती है कि नयी सरकार बनने के बाद शुरुआती कुछ महीने वह चुनाव में अपनी पार्टी के किए गए वादे पूरे करने में चुस्ती...

यादों के झरोखे से : रिक्शावाला

"कै गो अमदी है?" - रिक्शेवाले ने पूछा! "अमदी"? - आँखो में प्रशनचिन्ह लिए अपने दोस्त की ओर देखा! मेरा मित्र जो बगल मे खड़ा था, उसने कहा...

लिट्टी के अलावा आखिर मिलता क्या है बिहार में?

और फिर दन्तेश्वरी (एकिता) ने लिखा "गवर्नमेंट डिसाइड्स टू मेक लिट्टी चोखा ए नॅशनल फुड टू सेव बिहारी क्विज़ीन बिकॉज़ इट ओन्ली हैज़ वन डिश..", और दांत...

दिवाली पर बुद्धिजीवीयो के नाम खुला ख़त

डियर बुद्धिजीवियों, पटाखों से होने वाले प्रदुषण की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिये धन्यवाद। पटाखे तो खैर हमें जलाना ही था। बाकी आपसे पर्यावरण को बहुत...

वासुदेव, यमुना और नेशनल ग्रीन ट्रायब्यूनल

तेज़ वर्षा वाली रात में कंश का कारागार। श्रीकृष्ण का जन्म हो चुका है। वासुदेव उन्हें टोकरी में रखकर गोकुल जाने के लिए तैयार हैं। माता देवकी...

छटाक भर क्रिकेट

दिन भर आकाशवाणी से क्रिेकेट का आँखों देखा हाल सुनते मेरे पिताजी ने ही मेरे मन में क्रिकेट के प्रति प्रेम जगाया. बॉल बाई बॉल रोमांच से...

Ananda Coomaraswamy

“Ananda Coomaraswamy!” said my friend Rohit on Twitter, “You haven’t heard of him? Read him! Dance of Siva is his best book!” Over the next few days I...

जय बाबा री

“जै बाबा री” का उद्घोष अभी रामदेवरा जाने वाले प्रत्येक रास्ते पर पुरज़ोर गूँजता सुनाई दे जाएगा. कभी परमाणु परीक्षण से सुर्ख़ियो में आए देश के पश्चिमी...

बापी दास का क्रिसमस

यह निबंध नहीं बल्कि कलकत्ते में रहने वाले एक युवा, बापी दास का पत्र है जो उसने इंग्लैंड में रहने वाले अपने एक नेट-फ्रेंड को लिखा था....

नीम हकीम या वैद्यजी – चुनाव आपका

साधन संपन्न मगर भोलेभाले लोगों से भरपूर एक आदर्श गाँव था। गाँव वाले इतने सीधे थे कि उन्हें ना तो पंचायत की आवश्यकता थी और ना हीं...