और फिर दन्तेश्वरी (एकिता) ने लिखा “गवर्नमेंट डिसाइड्स टू मेक लिट्टी चोखा ए नॅशनल फुड टू सेव बिहारी क्विज़ीन बिकॉज़ इट ओन्ली हैज़ वन डिश..”, और दांत चियारते हुए अपने बिहारी मित्रो पर अपनी ताजा तरीन तंज कस दिया ! मैने भी अपने चिर परिचित अंदाज़ में चेतावनी दे डाली की फाफड़ा/ढोकला और लिट्टी युद्ध मे मज़बूती और टिकाऊपने के हिसाब से जीत बिहारियो की ही होनी हैं. चूँकि वो दाँतो की डागदर हैं तो दाँत चियार सकती हैं हम उनका बुरा नही मानते!

हम बिहारियो और हमारे गुज्जु मित्रों के बीच ये ठिठोली काफ़ी आम बात थी, हम उन्हे मीठी दाल और फाफड़ा पर घेरते थे वो लिट्टी पर किसी तरह से लटक के बच निकलते!

फिर एक दिन अचानक मुझे ध्यान मे ये बात आई की शायद लोगो को बिहारी व्यंजनों के बारे मे पता ही नही, बिहारी खाने के बहुत शौकीन होते हैं, मेरे जिले के लोग तो भतपेलु (चावल प्रेमी) नाम से प्रसिद्ध है (इसकी कहानी कभी और), बिहार मे “नाना” प्रकार के व्यंजन हैं, कुछ प्रचलन मे कम हो गये हैं और कुछ अभी भी ज़िंदा हैं, लिट्टी चोखा उनमे से सबसे पॉपुलर है, व्यवसायिक विस्थापन के चलते बिहारी पूरे देश मे फैले है, सो अपने साथ मे लिट्टी प्रेम भी फला रहे है, इसलिए उसकी बात नही करेंगे!

लोकप्रिय मत के विरुद्ध, बिहार राज्य ख़ान-पान के मामले मे काफ़ी समृद्ध हैं, माँसाहार से लेकर मिठाइयो तक बिहार मे कई स्वादिष्ट व्यंजन हैं जो आपको कहीं और नही मिलेंगे. उन्ही व्यंजनों का लेख जोखा इस स्तम्भ में हम लेंगे!

आम तौर पर व्यंजनो को 5 प्रकार मे बाँटा जा सकता हैं, माँसाहार, शाकाहार, जलपान, मिष्ठान व पेय।

मेरे प्रिय माँसाहार से शुरुआत करते हैं, उडंत (मुर्गे पक्षी इतयादी), चलंत (चार गोड़वा, चार पैर वाले- जैसे, बकरे) और जलंत (जल में पाए जाने वाले जैसे, मछलियां), सब खाते है हमलोग!

मैं बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले से आता हूँ, ये वही जगह हैं जहाँ से गाँधी जी ने सत्याग्रह की शुरुआत की थी, गाँधी जी को बकरियाँ पसंद थी, और चंपारण के लोगो को बकरा, यहाँ के लोग मटन का ताश (तवा फ्राइ मटन) और मटन आहूणा (हांडी गोश्त) के कसीदे कसते हैं. जीभ के पानी को संभालते हुए (और पूरे देश के भ्रमण और भोजन के बाद) मैं ये कह सकता हूँ की अगर सर्वोत्तम नही लगेगा तो ज़बरदस्त ज़रूर लगेगा! राहुल गाँधी के लफ़्ज़ों मे बोले तो “पहली बार आपको लगेगा की मज़ा आ गया, और आप ये मज़ा कई औरों को देना चाहेंगे”!

 

उड़ने वाले कई पक्षियों का भी आंनद उठाते रहे है! मुर्गे तीतर बटेर तो काफी कॉमन है, लेकिन कबूतर व बगेड़ी (lark sparrow) के डिश भी आपको मिल जाएंगे! बगेड़ी को साफ कर पूरा मसाला लगा कर फ्राई करते है! ये बहुत कम मिलता है इसलिए डेलिकेसी है!

Masala Fried Bageri

नदियों की भरमार होने के कारण, मीठे जल की मछलीयों के भी “नाना” प्रकार उपलब्ध है! गरई, पटेया, बोआरी, मोय इतयादी के कई तले व रसीले पकवान आपको मिलेंगे, इसमें सबसे यूनिक है मछली के अंडों के पकौड़े, जो बरसात के सीजन में मछलियों में पाये जाने वाले अंडों से बनता है!

Fish Egg Pakora

बात अब शाकाहारी व्यंजनों पर आती है तो अपनी पसंदीदा आलू की भुजिया की तारीफ कैसे न करूँ, बिहारी कहीं भी हो आलू की भुजिया नही छोड़ सकते, केवल आलू से बनने वाले इस व्यंजन को आप, परांठे, पूरी, रोटी और दाल चावल के साथ खा सकते हैं, बचपन मे आलू की भुजिया और सादा पराँठा मेरा पसंदीदा जलपान होता था और शायद मेरे विंटेज के कई लोगो का भी यही रहा होगा!

Aloo ki bhujia

घुघनी (काले चने का बहुत मसालेदार सब्ज़ी) और सत्तू के परांठे हो या चावल के आटे की रोटी और लहसुन मिर्च की चटनी, अपने आप मे बिलकुल अलग स्वाद देते है!

शादी ब्याह मे बनने वाले दाल की पूड़ी का कोई जवाब नही. बिहार में नयी नवेली दुल्हन से पहली बार ससुराल में खाना बनवाना बहुत बड़ी रस्म होती है, और ज्यादातर जगहों पर दुल्हन से यही दाल की पूरी और खीर बनवाई जाती हैं!

Chana daal puri aur kheer (saujany khaanpaan)

और फिर दालपिट्ठा को कौन भूल सकता हैं? पिसे हुए दाल के मसाला को चावल के आंटे मे भर कर बनाया जाने वाला ये डिश, आप नाश्ते मे या खाने मे कैसे भी खा सकते है!

Daal Pittha

इसी से दाल पिट्ठी जिसे “दाल की दुलहिन” भी बोलते हैं वो ध्यान मे आता हैं, इसका प्रचलन थोड़ा कम हो गया हैं, लेकिन भोजपुर (ज़िला) और आरा के आस पास के ज़िले मे अब भी ये अक्सर घरों मे डिन्नर के टेबल पे दिख जाएगा!

इसी तरह, अरबी के पत्ते की सब्ज़ी, आलू सरसो की सब्ज़ी, बाज़का (पकौड़े के बिहारी वर्ज़न), प्याज़ी/कचरी (प्याज़ के पकौड़े), भंग के पकौड़े इत्यादि बिल्कुल अलग टेस्ट लाते हैं. बिहारी पकौड़े में इस्तेमाल होने वाला लेप बहुत मसालेदार होता है जो इसको बाकी राज्यो से अलग करता है!

बिहारी साग और चटनी के भी ज़बरदस्त शौकीन होते हैं, मेरा मानना हैं की ये किसी भी पत्ते का साग बना देंगे, या किसी की भी चटनी बना सकते है, साग भी ऐसा जो केवल फोड़न का बनता हो, उसी तरह चोखा (भरता) और चटनी मे भी बहुत विविधता पाई जाती हैं, आलू, अमला, टमाटर, मिर्च, ओल, नेनुआ (तोरी) के फूल व लहसुन का चोखा बहुत आम हैं गाँव देहात में!

अब आते हैं अल्पाहार और हल्के भोजन पे, हालाँकि समोसे और कचौरी का काफ़ी बोलबाला हैं, लेकिन इसमे भी कई बिहारी सिग्नेचर स्नैक मिल जाते हैं. इसमे सबसे ज़्यादा मेरे फेव निमकी और लखटो है! मैदे से बनने वाली निमकी, जो की खुद ज़बरदस्त स्वादिष्ट होता हैं, उसको गुड मे डुबो कर लखटो बनाया जाता हैं. ये मगध और भोजपुर के आस पास के इलाक़ों मे ख़ासकर मिलता है!

इसी से मिलता-जुलता खुरमा और शक्करपारा भी होता है!

बहुत लोग ये मानते हैं की पानी-पूड़ी, जिसे बिहार मे गुपचुप या फुचका भी बोलते हैं उसकी उत्पत्ति बिहार में ही हुई (हालांकि, विकीपीडिया पर इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश बतया गया हैं!).

एक और व्यंजन ध्यान मे आता हैं, पूर्णिया इलाक़े में भक्का मिलता हैं, जो देखने मे इडली जैसा होता हैं लेकिन उसके अंदर गुड़ भरा होता है!

भकका
स्नैक्स की बात हो और ठेकुआ की बात ना हो ऐसा हो ही नही सकता, बिहार के सबसे बड़े पर्व छाठ में ये ख़ासकर बनाया जाता हैं, अगर छठ के समय किसी छठ व्रती के घर जाए तो ज़रूर खाएँ, ख़ासकर के गुड वाला ठेकुआ!

ठेकुआ

इसी तरह मिष्ठानों के मामले में भी बिहार में बहुत विविधता हैं. शुरुआत परवल मिठाई से करते हैं, परवल के अंदर मावे को स्टफ करके बनाए जाने वाली ये मिठाई, बहुत बड़े तबके  की पसंदीदा मिठाई हैं.

परवल मिठाई

मिथिला के मखाने की खीर अपने आप मे डेलीकेसी हैं

मखाने की खीर

सिलाव का खाजा और ग़ज़ा, मगध से उत्पन्न हुआ और बाद में लगभग हर शादी मे वर वधु पक्ष और बारातीयो सरातीयों में भेंट करने के लिए बनता हैं.

मनेर का लड्डू (मोतीचूर का लड्डू, खीरे के बीज के साथ) और बेलग्रामी (केवल पनीर से बनने वाला) आरा और बकसर ज़िले की विशेषता है!

रामदाना का लड्डू और अनरसा (तिल के छिड़काव के साथ) – मगध क्षेत्र की विशेषता है .

भगवानपुर (वैशाली) का काला जामुन (गुलाब जामुन से विभिन्न, ये केवल पनीर से बनता हैं और काला होता हैं!

चंपारण का बादशाही हो या भागलपुर और देवघर का केसरिया पेड़ा,

पटना ज़िले का चंद्रकला, पटना के महावीर मंदिर के आस पास के दुकानो मे ज़रूर खाएँ!

बेगूसराय का पंतुआ या समस्त बिहार का फेवरिट मालपुआ – विशेष अवसरों व त्योहारों खास कर होली/दीवाली के लिए!

और अंत मे गया का तिलकुट, जो मकर संक्रांति के समय बनता है, मकर संक्रांति के दिन तिल और तिलकुट दोनो खाने का रिवाज़ है!

इतनी विविधताओं के बीच मे समस्त भारत के मिष्ठानों का बोझ भी अलग हैं जो बिहारी समय समय पर उठाते रहते हैं.

बिहारी सामान्य खीर को भी गुड़ डाल के ज़बरदस्त टाइप कुछ बना देते हैं, छठ के समय अगर आप बिहार में हो तो किसी छठ व्रती के घर इसे प्रसाद के रूप में बिना सकोच मांग के ज़रूर खाएँ!

पेय (नोन-आल्कोहॉलिक) के मामले में भी बिहारी लोग के पास अनेक प्रकार हैं अन्य राज्य वालों को दिखाने के लिए.

इसमे सबसे प्रमुख हैं सत्तू का शरबत, भुने ज़ीरा के मसाले, प्याज़, मिर्च और नीबू डाल के बनाए जाने वाला ये पर शरीर को ठंडक पहुचता हैं, गर्मी के दिनो में कई घरों मे लोग सुबह सवेरे सत्तू पीते है, ताकी दिन भर पेट मे ठंडक रहे!

उसी प्रकार बेल (wood apple) का शरबत और आम झोरा (कच्चे आम को पका कर उसे बनाया जाने वाला शरबत) भी गर्मियों मे खूब चलता हैं.

आज़ादी पूर्व बिहार बंगाल और उड़ीसा एक ही राज्य थे और इसीलिए तीनो के खान पान के तरीकों में बहुत समानता दिखती है! सरसो के तेल का बृहद प्रयोग, मीठे जल की मछलियों की प्रधानता, मिठाइयों में समानता है, यहां तक कि झाल मुड़ी का टेस्ट लगभग एक जैसा मिलेगा इन राज्यो में! इन सबका संज्ञान न भी लें, तो भी बिहार में सामान्य पकवान को भी अलग तरीक़े से बनया जाता है, जिससे उसके स्वाद में काफी अंतर दिखता है! बिहारी कढ़ी बड़ी या पकौड़े इसके ज्वलन्त उदाहरण है!

इतना होने के बाद भी कई लोग पूछते हैं की बिहार में लिट्टी के सिवा होता क्या हैं, उनको जवाब देने के लिए एक चालू शेर कहूँगा…

एक क्या, मिलेंगे खाने के प्रकार हज़ारों,
एक कदम बिहार के तरफ ईमानदारी से उठाओ यारों..

Writer @vikrantkumar 

4 COMMENTS

  1. Awesome collection and very well written 🙂
    With you permission can I add the following
    Dahi vada – the best version comes from Bihar
    The khichadi lunch every Saturday w/ chokha, chutney, raita, tilori, achar, ghee n salad….yummm
    Khohade ke phool (pumpkin flower) ke pakode- very simple n unique

  2. लोपक मे छपने वाले लेखों मे मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही प्रचुर बढ़ी है। यह ताज़ा लेख इस बात का प्रमाण है। साधुवाद।

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