वे दोनों पहली बार नौ नवम्बर को एटीएम के बाहर मिले. चार घण्टे लाइन में रहे लेकिन उनका नम्बर आने से पहले पैसे खत्म हो गये. लड़की खुद से ही बोली; “ओह शीट! अब क्या करें? स्कूटी की टैंक को भी आज ही खाली होना था.” अंकित ने पहली बार पीछे घूमकर देखा. एक खूबसूरत लम्बी छरहरी व औसत से बेहतर नैन-नक्श की लड़की उदास खड़ी थी. बंडा एसोशिएशन हेड बिहारी अंकित सहायता भाव से बोला; “एक्सक्यूज़ मी. आप चाहें तो मेरे पैसे से तेल भरवा लीजिए. शायद किसी और ब्रांच या एटीएम से पैसे मिल जाएं.” लड़की मुस्कुरा कर धन्यवाद कहती है और उसे पीछे स्कूटी पर बैठने का इशारा करती है.

200 का पेट्रोल भरा दोनों अनेक एटीएम के चक्कर लगाते हैं. लाइन हर जगह पहले से बड़ी ही दिखती है. लड़की हर जगह ‘शीट’ कहती है। तभी अंकित अपनी बिहारी बुद्धि लगाता है और लड़की से कहता है; “सुनो मेरे पास 10,000 रुपये हैं. क्यों न हम बन्धन बैंक चलें. नया बैंक है, काउंटर खाली हो सकता है. एक्सचेंज हो जायेगा.” लड़की फिर से मुस्कुराती है, अंकित लुट जाता है मन ही मन.

अंकित गूगल से बन्धन बैंक का ब्रांच ढूँढता है. वहाँ उसकी आशा के मुताबिक भीड़ कम है. एक्सचेंज के 8000 रुपये में से 4000 अंकित उस लड़की को देता है और बोलता है; “ये पैसे आज आप रख लीजिए, कल एटीएम से निकले तो दे दीजियेगा.” लड़की; “ये आप आप क्या लगा रखा है. आई एम अंकिता. एंड यू?” दीवाली की जुआ से दोस्तों का डेयर तक हारने वाले अंकित की तो जैसे लॉटरी ही लग गयी.

रस्म के अनुसार दोनों मोबाइल नम्बर एक्सचेंज करते हैं. सुबह एटीएम के लिए निकलने से पहले अंकित ने मोदीजी को ट्विटर से लेकर ग़ैब तक पर खूब गरियाया था. लेकिन घर आते ही वो सारे पोस्ट्स डिलीट करता है और एस गुरुमूर्ति के ट्विटर पोस्ट फेसबुक पर पोस्ट करता है और वैद्यनाथन के फेसबुक पोस्ट ट्विटर पर चढ़ा के Demonetisation को अपना नि:शर्त समर्थन दे देता है.

आँखों ही आँखों में रात काटने वाला अंकित रतजगे की खुमार और दिल में हसरतों की बहार लिए नियत समय पर एटीएम आ गया. लड़की नियमानुसार समय से एक घण्टे बाद आई. अंकित उसका स्वागत करता है और बताता है उसकी लाइन आखिरी से 15 आगे और पहले से 244 पीछे है. लड़की कुछ सोच कर कहती है: “ये एटीएम हमारा नम्बर आने से पहले ही ख़ाली हो जायेगा. चलो कहीं और देखते हैं.”

बिहारी होने के वावजूद अंकित में कोई मेल ईगो नहीं है. लड़की की स्कूटी के पीछे बैठने में भी कोई संकोच नहीं. वे दोनों एटीएम दर एटीएम भटकते हैं. आखिर में एक गली में उन्हें करुड वैश्य बैंक का एक अपेक्षाकृत खाली एटीएम मिलता है. दोनों घण्टा भर में 2-2 हजार रूपये निकालने में कामयाब होते हैं. लड़की थैंक गॉड कहती है. अंकित हीही करके बत्तीसी दिखाता है. लेकिन तभी लड़की फिर से ओह शीट का नारा देते हुए कहती है; “आई हैव टू रिपे यू 4000 ना.” अंकित दिलासा देता है; “कोई नहीं, कल फिर यहाँ आएंगे, तब दे देना.” लड़की स्माइल के साथ थैंक्स कहना नहीं भूलती. अंकित थैंक्स के जवाब में एक औसत बिहारी के तरह निरुत्तर ही रहता है. रैपिडेक्स के रट्टा के काम आने की भी एक सीमा होती है.

अंकित के पैर आज जमीन पर नही पड़ रहे. वह घर आकर मोदीजी को पुनः धन्यवाद देता है और जिस केजरीवाल को वह भगवान मानता था, उसको अलंकारिक गालियां देता है और फिर पूरी रात अंकित-अंकिता की ‘गनना-मनना’ बैठाता है बिना पंडित, बिना ‘पतरा’. अगले दिन अंकित और अंकिता टेलीग्राम पर हुई वार्ता के अनुसार करुड़ बैंक एटीएम में मिलते हैं पर वहाँ कैश नहीं है. अंकिता उदास हो जाती है क्योंकि अगले दिन सुबह उसे पैसों की जरुरत है. अंकिता की उदासी से अंकित का दिल बैठने लगता है. तभी उसे सूझता है कि उसके कैम्पस में एक एसबीआई एटीएम है जिसके गार्ड ने उसे बताया था कि यहाँ कल रात ११ बजे पैसे डाले गये थे. वह अंकिता को रात साढ़े दस के बाद उस एटीएम में आने को कहते है.

अंकित की बाँछे अब खिल चुकी थी. अंकित समय से पूर्व ही एटीएम पहुँच जाता है. अंकिता भी 11 बजे आ जाती है। आते ही पूछती है; “कैश आया क्या?” अंकित हड़बड़ी में नहीं है, कहता है; “आ जायेगा, जल्दी क्या है.” फिर दोनों बतियाने लगते हैं. बिग बॉस से लेकर ऐ दिल है मुश्किल सबकी चर्चा होती है. अचानक मिले पारितोषिक से डीमॉनेटाइजेशन पर अंकित उत्साहित सा है, हुई परेशानियों से अंकिता तटस्थ. पूरी बातचीत में दोनों में कुछ कॉमन निकलकर नहीं आता, कॉमन था तो बस एटीएम से पैसों की जरुरत.

आज अंकिता के अलावा कायनात भी अंकित साथ है. अचानक ससुर कुत्ते आकर भौंकने लगते हैं. अंकिता चिल्लाती है… बचाओ और अंकित योजनानुसार उसे एटीएम में ले जाता है. “नाउ वी आर सेफ.”अंकित इस बार पूरा वाक्य अंग्रेज़ी में बोल जाता है.

साथ सुगंधित हो समय का पता नहीं चलता. दो बज गये. एटीएम में तभी लड़कियों के लिए राक्षस जैसा तिलचट्टा दिख जाता हैं. फिर वही होता है जो ७० के दशक की हिन्दी फिल्मों में तितली और फूल के संकेतों में दिखाया जाता था. 5 मिनट बाद अंकिता शर्माते हुए अंकित से अलग होती है. लेकिन अब तो कायनात जिद करने भी लगी. ठंढ के दिनों में बिन मौसम की बिजली कड़कती है और फिर चेतन भगत के उपन्यासों का रुमानी चित्रण सजीव हो उठता है.
पहले प्यार दुश्वारियां ढ़ूढ़कर किया जाता था, आधुनिक प्यार सुविधा और उपलब्धता देखकर भड़कता है. पहले शायद यह नि:स्वार्थ होता है, अब पारस्परिक जरुरत से उपजता है. पहले अंधा होता है, अब काना है और कानी आँख से बहुत कुछ देखकर किया जाता है. अंकिता और अंकित का प्यार इन सारी खूबियों पर खरा उतरता है. इसलिए एटीएम कैश क्रंच से शुरु हुआ प्यार एटीएम पर कैश की स्थिति सामान्य होने पर भी बाहर परवान चढ़ रहा है. कितना लंबा चलेगा, कह नहीं सकते. युग तो ऐसा है:

मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम
मेट्रो में शुरु शॉपिंग मॉल में खतम

लेखक – मुकुल मिश्र (@MukulKMishra)

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